भगवंत मान सरकार के रिकॉर्ड विकास और जनकल्याण के कामों से विपक्ष घबराया, नशे पर राजनीति कर रहा है: बलतेज पन्नू

आम आदमी पार्टी आप पंजाब मीडिया इंचार्ज और ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ मिशन के प्रवक्ता बलतेज पन्नू ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की लीडरशिप वाली पंजाब सरकार ने राज्य के विकास और लोगों की भलाई के लिए जो शानदार काम किए हैं, उनसे विरोधी पार्टियां पूरी तरह डर गई हैं। खेतों तक नहर का पानी 22% से बढ़ाकर 88% करना, आम लोगों को 600 यूनिट मुफ्त बिजली देना, 10 लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज के साथ हेल्थ कार्ड देना और महिलाओं के अकाउंट में 1000 से 1500 रुपये की मदद देना जैसी क्रांतिकारी कामयाबियों ने विपक्ष के मुद्दे खत्म कर दिए हैं। इसीलिए विरोधी पार्टियां ड्रग्स के मुद्दे को राजनीतिक हथियार बनाकर सरकार के लोगों के हक में किए जा रहे विकास के कामों को दबाने की नाकाम कोशिश कर रही हैं।

 

प्रेस कॉन्फ्रेंस में बलतेज पन्नू ने पिछली सरकारों की नाकामियों का खुलासा करते हुए कहा कि 2007 से 2017 तक अकाली-भाजपा गठबंधन के शासन में पंजाब की पवित्र धरती पर पहली बार ‘चिट्टे’ का नाम सुना गया, जिसने धीरे-धीरे राज्य के युवाओं को निगलना शुरू कर दिया। इसके बाद 2017 में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने वोट पाने के लिए पवित्र श्री गुटका साहिब और देश के संविधान की झूठी कसम खाई, लेकिन जीतने के बाद अपने नए महल में बैठकर अपने दोस्त के सहारे सरकार छोड़ दी और ड्रग्स के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

 

उन्होंने कहा कि 2022 में मान सरकार आने के बाद सही प्लानिंग के साथ कई एंगल से ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ शुरू किया गया। इस लड़ाई में पंजाब पुलिस का पॉजिटिव रोल, सिविल प्रशासन की तत्परता और आम जनता की मिली-जुली भागीदारी बहुत अहम रही है। राज्य में 1 लाख से ज़्यादा नागरिक ‘विलेज डिफेंस कमेटियों’ और ‘वार्ड डिफेंस कमेटियों’ के मेंबर बनकर सरकार का साथ दे रहे हैं। पंजाब के इस जन आंदोलन मॉडल की चर्चा अब देश-विदेश में हो रही है, जिसका इजहार बिहार के डीजीपी ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में छपे अपने इंटरव्यू में किया, जिन्होंने पंजाब के जन समर्थन मॉडल से सीखने की बात कही है। अमेरिका में एफबीआई द्वारा किए गए ‘ऑपरेशन हार्डबॉल’ जैसे एक्शन सिर्फ पुलिस तक ही सीमित हैं, जबकि पंजाब में यह लोगों के साथ लड़ी जा रही एक अनोखी लड़ाई है।

 

 

कैबिनेट मीटिंग में लिए गए ज़रूरी फ़ैसले का ज़िक्र करते हुए पन्नू ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की लीडरशिप में ड्रग्स के मामलों को तेज़ी से निपटाने के लिए 35 नए समर्पित एनडीपीएस कोर्ट बनाने की मंज़ूरी दी गई है। इसके लिए 35 एडिशनल डिस्ट्रिक्ट और सेशन जजों समेत कुल 385 नए पदों को मंज़ूरी दी गई है। उन्होंने कहा कि राज्य में हर साल लगभग 20,000 एनडीपीएस केस रजिस्टर होते हैं और 27,000 गिरफ्तारियां होती हैं, जिनमें से 12,000 केस सेशन कोर्ट में जाते हैं, लेकिन दूसरी कोर्ट पर बोझ होने की वजह से सिर्फ़ 5,700 केस ही निपटाए गए। 31 अगस्त, 2026 तक पेंडिंग केसों की संख्या 52,777 तक पहुंच गई थी, जिन्हें निपटाने में 8 साल तक लग सकते थे। इन स्पेशल और डेडिकेटेड कोर्ट के बनने से केसों की फास्ट ट्रैक सुनवाई सुनिश्चित होगी।

 

कोर्ट के रिकॉर्ड और द इंडियन एक्सप्रेस के डेटा का हवाला देते हुए पन्नू ने कहा कि पंजाब पुलिस की ईमानदार, सही और समय पर जांच और ठोस सबूत पेश करने की वजह से आज एनडीपीएस मामलों में सज़ा मिलने की दर पूरे देश में सबसे ज़्यादा है। कांग्रेस सरकार के दौरान सज़ा मिलने की दर सिर्फ़ 58% के आस-पास थी, जबकि मान सरकार के दौरान 2017-2023 के मुकाबले 2022-2026 के दौरान एनडीपीएस मामलों और गिरफ्तारियों की कुल संख्या में 40 से 45% की बढ़ोतरी हुई।

 

कन्विक्शन रेट की डिटेल्स शेयर करते हुए उन्होंने कहा कि 2022 में यह रेट 80% (4,812 में से 3,870 केस में कन्विक्शन), 2023 में 81%, 2024 में 85%, 2025 में 88% (7,373 में से 6,488 केस में कन्विक्शन) था और 2026 की शुरुआत में यह बढ़कर 89% हो गया है, जिसमें से 1,831 केस में से 1,634 केस में कन्विक्शन हो चुका है। 35 डेडिकेटेड एनडीपीएस कोर्ट के चालू होने से यह कन्विक्शन रेट 100% तक पहुंच जाएगा।

 

ड्रग्स के खिलाफ मान सरकार की जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी पर जोर देते हुए मीडिया इंचार्ज ने कहा कि पिछली सरकारों के दौरान जब राजा कंदोला, भोला या सरपंच रानो जैसे ड्रग तस्कर पकड़े जाते थे, तो सत्ताधारी नेताओं के साथ उनकी तस्वीरें तुरंत सामने आती थीं। लेकिन 2022 के बाद से हमारे किसी भी मंत्री, विधायक या पदाधिकारी की तस्वीर तो दूर, उनका नाम भी कहीं नहीं आया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने साफ आदेश दिया है कि ड्रग्स के मामले में थाने या कोर्ट में किसी भी पदाधिकारी की सिफारिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टियों के पास कोई मुद्दा नहीं बचा है और उन्हें सिर्फ सुबह उठकर लाशें ढूंढना और माइक पकड़कर राजनीति करने में दिलचस्पी है। जबकि मान सरकार ने मुद्दों पर राजनीति की है, लोगों को राहत दी है और 2027 में अपने कामों के आधार पर जनता की अदालत में जाएगी। ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ लड़ाई तब तक लगातार जारी रहेगी जब तक पंजाब से ड्रग्स पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता।

 

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