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	<title>Dharam Archives - Welcome To Ind Lives News, Latest News Hindi, Breaking News in Hindi, Live Hindi News Headlines, Top News India, Current Hindi News World, Entertainment News Hindi, Sports News Hindi, Cricket News Hindi, Business News Hindi, Popular Videos - IndLives.com</title>
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		<title>Shri Guru Tegh Bahadur Ji के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित विशाल Nagar Kirtan Srinagar से रवाना, बड़ी संख्या में संगत की मौजूदगी</title>
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		<pubDate>Wed, 19 Nov 2025 23:45:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित ऐतिहासिक और विशाल नगर कीर्तन आज श्रीनगर के गुरुद्वारा छठी पातशाही साहिब से रवाना हो गया। इस खास मौके पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान, AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने संगत के साथ उपस्थित होकर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित ऐतिहासिक और विशाल नगर कीर्तन आज श्रीनगर के गुरुद्वारा छठी पातशाही साहिब से रवाना हो गया। इस खास मौके पर पंजाब के मुख्यमंत्री <strong>भगवंत सिंह मान</strong>, AAP के राष्ट्रीय संयोजक <strong>अरविंद केजरीवाल</strong> और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री <strong>उमर अब्दुल्ला</strong> ने संगत के साथ उपस्थित होकर माथा टेका और अरदास की।</p>
<p>नगर कीर्तन खालसा की जन्मभूमि <strong>श्री आनंदपुर साहिब</strong> की ओर जा रहा है, जहां यह <strong>22 </strong><strong>नवंबर</strong> को संपन्न होगा। रास्ते में यह जम्मू, पठानकोट, दसूहा, होशियारपुर, माहिलपुर और गढ़शंकर जैसे शहरों से गुजरेगा।<br />
रात्रि पड़ाव—</p>
<ul>
<li>19 नवंबर: <strong>जम्मू</strong></li>
<li>20 नवंबर: <strong>पठानकोट</strong></li>
<li>21 नवंबर: <strong>होशियारपुर</strong></li>
</ul>
<p>संगत की सुविधा के लिए काफिले में <strong>एंबुलेंस, </strong><strong>डिजिटल म्यूजियम, </strong><strong>लंगर की व्यवस्था और अन्य जरूरी सुविधाएँ</strong> शामिल की गई हैं।</p>
<h2><strong>गुरु साहिब की शहादत</strong><strong>—</strong><strong>मानवता के लिए अद्वितीय मिसाल</strong></h2>
<p>CM भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल ने कहा कि नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी ने मानवता और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपना जीवन कुर्बान किया। उनकी शहादत का संदेश आज भी दुनिया के लिए प्रेरणा है।</p>
<p>दोनों नेताओं ने कहा कि गुरु जी का <strong>शांति, </strong><strong>प्रेम, </strong><strong>भाईचारा और मानव अधिकारों का संदेश</strong> आज के समय में भी उतना ही जरूरी है जितना सदियों पहले था। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे गुरु साहिब की बताई विचारधारा पर चलें और समाज में एकता और सद्भावना को मजबूत करें।</p>
<h2><strong>&#8220;</strong><strong>अकाल पुरख की मेहर&#8221;</strong><strong>—</strong><strong>सेवा निभाने पर पंजाब सरकार ने जताया आभार</strong></h2>
<p>इस मौके पर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पंजाब सरकार पर अकाल पुरख की मेहर है कि उसे इतने बड़े ऐतिहासिक आयोजन की सेवा निभाने का अवसर मिला।<br />
CM भगवंत मान ने भी कहा कि यह अवसर सरकार के लिए सौभाग्य की बात है और इस पवित्र आयोजन में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी।</p>
<h2><strong>पंजाब सरकार के देश-भर में कार्यक्रम</strong></h2>
<p>शहीदी दिवस से जुड़े कार्यक्रमों की शुरुआत <strong>25 </strong><strong>अक्टूबर</strong> को दिल्ली के गुरुद्वारा <strong>सीस गंज साहिब</strong> से हुई थी। उसी दिन गुरुद्वारा <strong>रकाब गंज साहिब</strong> में भी बड़ा कीर्तन दरबार हुआ।</p>
<p>पंजाब के सभी जिलों में <strong>1 </strong><strong>से 18 </strong><strong>नवंबर तक लाइट एंड साउंड शो</strong> हुए, जिनमें गुरु साहिब के जीवन और दर्शन को दिखाया गया। जिन नगरों में गुरु साहिब के चरण पड़े, वहाँ कीर्तन दरबार आयोजित किए जा रहे हैं।<br />
18 नवंबर को श्रीनगर में भी बड़ा कीर्तन दरबार हुआ।</p>
<h2><strong>चार दिशाओं से नगर कीर्तन</strong></h2>
<p>अधिकारी जानकारी के अनुसार इस बार <strong>चार नगर कीर्तन</strong> सजाए जा रहे हैं—</p>
<ol>
<li><strong>श्रीनगर</strong> से (पहला नगर कीर्तन – जो अब रवाना हो चुका है)</li>
<li><strong>20 </strong><strong>नवंबर</strong> को तख्त श्री दमदमा साहिब (तलवंडी साबो) से</li>
<li><strong>फरीदकोट</strong> से</li>
<li><strong>गुरदासपुर</strong> से</li>
</ol>
<p>ये सभी नगर कीर्तन <strong>22 </strong><strong>नवंबर को श्री आनंदपुर साहिब</strong> पहुँचकर एक साथ मिलेंगे।</p>
<h2><strong>23 </strong><strong>से </strong><strong>25 </strong><strong>नवंबर: श्री आनंदपुर साहिब में भव्य समागम</strong></h2>
<p>इन तीन दिनों के लिए श्री आनंदपुर साहिब में “<strong>चक्क नानकी</strong>” नाम की बड़ी टेंट सिटी लगाई गई है, जहाँ हजारों श्रद्धालु ठहर सकेंगे। समागम में शामिल हैं—</p>
<ul>
<li>गुरु साहिब की शिक्षाओं पर <strong>प्रदर्शनियां</strong></li>
<li><strong>ड्रोन शो</strong></li>
<li><strong>अंतर-धर्म सम्मेलन</strong></li>
<li>24 नवंबर को <strong>पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र</strong></li>
<li>25 नवंबर को
<ul>
<li><strong>राज्य स्तरीय रक्तदान शिविर</strong></li>
<li><strong>पौधारोपण अभियान</strong></li>
<li>विशाल <strong>“</strong><strong>सरबत दा भला” </strong><strong>एकत्रीकरण</strong></li>
</ul>
</li>
</ul>
<p>दुनिया भर के प्रमुख आध्यात्मिक नेताओं और संतों को भी इन आयोजनों में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है।</p>
<h2><strong>सिख संगत का गर्मजोशी भरा स्वागत</strong></h2>
<p>मुख्यमंत्री मान और केजरीवाल ने कहा कि वे जम्मू-कश्मीर की सिख संगत के समर्पण और श्रद्धा से बेहद प्रभावित हुए हैं। उन्होंने खासतौर पर CM उमर अब्दुल्ला का धन्यवाद किया, जिन्होंने खुद संगत के साथ खड़े होकर इस ऐतिहासिक पल को साझा किया।</p>
<h2><strong>कार्यक्रम में मौजूद प्रमुख हस्तियाँ</strong></h2>
<p>इस मौके पर संत बाबा सेवा सिंह रामपुर खेड़ा वाले, गुरुद्वारा छठी पातशाही के प्रधान जसपाल सिंह, सचिव गुरमीत सिंह सहित कई संत महापुरुष मौजूद थे।<br />
इसके साथ ही पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां, मंत्री हरपाल सिंह चीमा, अमन अरोड़ा, तरुणप्रीत सिंह सौंद, डॉ. बलजीत कौर, हरभजन सिंह ETO, बरिंदर गोयल, डॉ. रवजोत, हरदीप मुंडियां, सांसद बाबा बलबीर सिंह सीचेवाल और अन्य अधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल रहे।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Diwali आज: दोपहर 3:30 से शुरू होगा पहला पूजा मुहूर्त, जानिए लक्ष्मी पूजा की विधि और Diwali से जुड़ी 5 खास कहानियां</title>
		<link>https://indlives.com/diwali-%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b0-330-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b6%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%82-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b2/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[indlives]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 19 Oct 2025 22:30:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Dharam]]></category>
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					<description><![CDATA[आज पूरा देश दीपावली के रोशनी भरे त्योहार को मनाने की तैयारी में है। अमावस्या तिथि आज दोपहर 3:30 बजे से शुरू होगी और अगले दिन सुबह 5:25 बजे तक रहेगी। यानी आज से लेकर कल सुबह तक आप लक्ष्मी पूजन कर सकते हैं। इस बार दीपावली पर कुल 8 शुभ मुहूर्त रहेंगे। यह दिन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>आज पूरा देश <strong>दीपावली</strong> के रोशनी भरे त्योहार को मनाने की तैयारी में है।<br />
<strong>अमावस्या तिथि</strong> आज दोपहर <strong>3:30 </strong><strong>बजे से शुरू</strong> होगी और <strong>अगले दिन सुबह </strong><strong>5:25 </strong><strong>बजे तक</strong> रहेगी।<br />
यानी आज से लेकर कल सुबह तक आप <strong>लक्ष्मी पूजन</strong> कर सकते हैं।<br />
इस बार दीपावली पर <strong>कुल </strong><strong>8 </strong><strong>शुभ मुहूर्त</strong> रहेंगे।</p>
<p>यह दिन <strong>धन</strong><strong>, </strong><strong>समृद्धि और खुशहाली की देवी लक्ष्मी</strong>, <strong>विघ्नहर्ता गणेश</strong> और <strong>धन के देवता कुबेर</strong> की पूजा को समर्पित है।<br />
लोग अपने घरों और दफ्तरों को दीयों, लाइट्स और रंगोली से सजाकर माँ लक्ष्मी का स्वागत करते हैं।</p>
<h2>दीपावली क्यों मनाई जाती है? जानिए इस पर्व की 5 प्रमुख कथाएं</h2>
<h3>1 <strong>समुद्र मंथन से देवी लक्ष्मी का प्रकट होना</strong></h3>
<p>कहानी के अनुसार, देवता और दैत्य जब <strong>अमृत पाने के लिए समुद्र मंथन</strong> कर रहे थे, तो उसमें से <strong>14 </strong><strong>रत्न</strong> निकले।<br />
इन्हीं में से एक थीं <strong>देवी लक्ष्मी</strong>।<br />
कहा जाता है कि वे पहले से मौजूद थीं, लेकिन किसी बात से नाराज होकर <strong>समुद्र में छिप गईं</strong>।<br />
हजारों साल बाद वे समुद्र मंथन से फिर प्रकट हुईं।<br />
वह दिन <strong>कार्तिक अमावस्या</strong> का था, इसलिए उसी दिन को <strong>दीपावली और लक्ष्मी पूजा</strong> के रूप में मनाया जाता है।</p>
<h3>2 <strong>मां काली की पूजा: पश्चिम बंगाल की परंपरा</strong></h3>
<p>जब देशभर में लोग लक्ष्मी पूजा करते हैं, वहीं <strong>पश्चिम बंगाल</strong> में इस दिन <strong>काली मां की पूजा</strong> होती है।<br />
माना जाता है कि <strong>मां काली</strong> ने इस रात <strong>रक्तबीज</strong> जैसे शक्तिशाली असुरों का संहार किया था।<br />
उसी रात यानी <strong>कार्तिक अमावस्या</strong> को देवी की शक्ति और विजय के प्रतीक के रूप में <strong>दीप जलाकर पूजा</strong> की जाती है।</p>
<h3>3 <strong>राजा बलि और भगवान वामन की कहानी (दक्षिण भारत)</strong></h3>
<p>यह कथा खासकर <strong>केरल और दक्षिण भारत</strong> में प्रसिद्ध है।<br />
<strong>दैत्यराज बलि</strong> एक पराक्रमी और दयालु राजा थे।<br />
उन्होंने एक बड़ा यज्ञ किया, जिससे देवताओं को लगा कि वे स्वर्गलोक पर भी अधिकार कर लेंगे।<br />
तब <strong>भगवान विष्णु</strong> ने <strong>वामन अवतार</strong> लिया और बलि से <strong>तीन पग भूमि</strong> मांगी।<br />
दो पगों में उन्होंने <strong>आसमान और धरती</strong> नाप ली और तीसरा पग बलि के सिर पर रखकर उन्हें <strong>पाताल लोक भेज दिया</strong>।<br />
लेकिन उनकी भक्ति से खुश होकर विष्णु ने उन्हें <strong>साल में एक दिन धरती पर आने की अनुमति दी</strong>।<br />
दक्षिण भारत में उसी दिन <strong>दीप जलाकर बलि राजा के स्वागत</strong> में दीपोत्सव मनाया जाता है।</p>
<h3>4 <strong>भगवान श्रीराम का अयोध्या लौटना</strong></h3>
<p>14 साल का <strong>वनवास पूरा कर जब श्रीराम</strong><strong>, </strong><strong>सीता और लक्ष्मण</strong> अयोध्या लौटे, तो पूरे नगर में खुशियों की लहर दौड़ गई।<br />
अयोध्यावासियों ने अपने घरों में <strong>दीए जलाए</strong> और पूरे नगर को <strong>रोशनी से सजाया</strong>।<br />
वह रात <strong>कार्तिक अमावस्या</strong> की थी, और तभी से <strong>दीयों से अंधकार मिटाने वाला यह पर्व दीपावली</strong> कहलाया।</p>
<h3>5 <strong>युधिष्ठिर का राजसूय यज्ञ (महाभारत काल की कथा)</strong></h3>
<p>कौरवों से विभाजन के बाद पांडवों को जो जंगल मिला, उसे उन्होंने <strong>इंद्रप्रस्थ</strong> नामक सुंदर राज्य में बदल दिया।<br />
राजा <strong>युधिष्ठिर</strong> ने वहां <strong>राजसूय यज्ञ</strong> का आयोजन किया, जिसमें सैकड़ों राजा और प्रमुख लोग आए।<br />
राज्य की स्थापना के इस अवसर पर <strong>भव्य उत्सव मनाया गया</strong>, और उसी दिन से <strong>दीपावली का त्योहार</strong> मनाने की परंपरा बनी।</p>
<h2>लक्ष्मी पूजन की सही विधि और मान्यताएं</h2>
<h3><strong>कौन-सी तस्वीर की पूजा करनी चाहिए</strong><strong>?</strong></h3>
<ul>
<li><strong>खड़ी हुई लक्ष्मी जी की तस्वीर</strong> की पूजा नहीं करनी चाहिए।</li>
<li><strong>उल्लू पर बैठी लक्ष्मी जी</strong> की भी पूजा नहीं करनी चाहिए।</li>
<li>सबसे शुभ मानी जाती है <strong>कमल के फूल पर बैठी लक्ष्मी जी</strong> की तस्वीर या मूर्ति।</li>
<li>लक्ष्मी जी के साथ <strong>भगवान गणेश</strong> और <strong>कुबेर जी</strong> की भी पूजा करना चाहिए।</li>
</ul>
<h3></h3>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone  wp-image-25995" src="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2025/10/ipjt8n1760721454_1760804679-300x169.jpg" alt="" width="707" height="398" /></p>
<h3></h3>
<h3><strong>पूजन विधि (</strong><strong>Lakshmi Puja Vidhi): </strong><strong>आसान तरीका</strong></h3>
<ol>
<li>सबसे पहले घर और पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करें।</li>
<li>चौकी या लकड़ी के पट्टे पर <strong>लाल कपड़ा बिछाकर</strong> मूर्तियाँ स्थापित करें।</li>
<li>पहले <strong>गणेश जी</strong> का पूजन करें, फिर <strong>लक्ष्मी जी</strong> का।</li>
<li>देवी को <strong>फूल</strong><strong>, </strong><strong>चावल</strong><strong>, </strong><strong>मिठाई</strong><strong>, </strong><strong>सिक्के और कपूर</strong> अर्पित करें।</li>
<li>मंत्र “<strong>ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः</strong>” का जाप करें।</li>
<li>पूजा के बाद घर के <strong>हर कोने में दीप जलाएं</strong> ताकि घर में सकारात्मक ऊर्जा फैले।</li>
</ol>
<h2>दीपावली का संदेश</h2>
<p>दीपावली सिर्फ <strong>धन और पूजा का त्योहार</strong> नहीं है, बल्कि <strong>अंधकार पर प्रकाश की जीत</strong> और <strong>बुराई पर अच्छाई की विजय</strong> का प्रतीक है।<br />
इस दिन हर कोई अपने घर, मन और जीवन में <strong>खुशियों की रोशनी जलाने</strong> का संकल्प लेता है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>7 Unique Diwalis: Bengal में जलती चिताओं के बीच होती है Kali Puja, 154 साल पुरानी Tradition अब भी जारी</title>
		<link>https://indlives.com/7-unique-diwalis-bengal-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%9c%e0%a4%b2%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%93%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%9a/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[indlives]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 18 Oct 2025 01:19:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Dharam]]></category>
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					<description><![CDATA[जहां देशभर में दिवाली दीयों, मिठाइयों और आतिशबाज़ी से रोशन होती है, वहीं पश्चिम बंगाल में दिवाली की रात एक अनोखा और रहस्यमयी नज़ारा देखने को मिलता है। यहां दीपावली के दिन काली पूजा होती है — और वो भी किसी मंदिर में नहीं, बल्कि श्मशान घाट में। महाश्मशान में जलती चिताओं के बीच पूजा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>जहां देशभर में दिवाली दीयों, मिठाइयों और आतिशबाज़ी से रोशन होती है, वहीं <strong>पश्चिम बंगाल</strong> में दिवाली की रात एक अनोखा और रहस्यमयी नज़ारा देखने को मिलता है।<br />
यहां दीपावली के दिन <strong>काली पूजा</strong> होती है — और वो भी किसी मंदिर में नहीं, बल्कि <strong>श्मशान घाट</strong> में।</p>
<h3><strong>महाश्मशान में जलती चिताओं के बीच पूजा</strong></h3>
<p>कोलकाता का <strong>केवड़ातला महाश्मशान</strong> इस पूजा के लिए जाना जाता है। यह जगह मशहूर <strong>कालीघाट मंदिर</strong> के पास है, जहां चौबीसों घंटे चिताएं जलती रहती हैं।<br />
इसी वजह से इसे “<strong>महाश्मशान</strong>” कहा जाता है।<br />
हर साल यहां <strong>डोम संप्रदाय</strong> के लोग श्मशान की दीवारों की सफाई और रंगाई-पुताई करते हैं, क्योंकि दिवाली के दिन यहीं पर मां काली की पूजा होती है।</p>
<p>पूजा के आयोजक <strong>उत्तम दत्त</strong> बताते हैं कि यहां पूजा की परंपरा बाकी जगहों से बिल्कुल अलग है।</p>
<p>“जब तक श्मशान में कोई शव नहीं आता, हम देवी को भोग नहीं चढ़ाते। और पूजा के समय यहां जलने वाली एक चिता को पंडाल में रखा जाता है,”<br />
वे कहते हैं।</p>
<p>ऐसा कहा जाता है कि पूरे बंगाल में इस तरह की पूजा <strong>सिर्फ कालीघाट के श्मशान</strong> में होती है।</p>
<h3><strong>150 </strong><strong>साल पुरानी परंपरा</strong><strong>, </strong><strong>काली की अलग रूप में होती पूजा</strong></h3>
<p>यह परंपरा करीब <strong>1870 </strong><strong>में शुरू हुई थी</strong>, जब एक <strong>कापालिक साधु</strong> ने दो स्थानीय ब्राह्मणों की मदद से श्मशान में पहली बार पूजा की थी।<br />
तब से लेकर अब तक, यह परंपरा हर साल बिना रुके निभाई जा रही है।</p>
<p>यहां मां काली की मूर्ति भी बाकी जगहों से अलग होती है —<br />
आम तौर पर काली माता की मूर्तियों में <strong>8 </strong><strong>से </strong><strong>12 </strong><strong>हाथ</strong> और <strong>बाहर निकली हुई जीभ</strong> होती है,<br />
लेकिन इस पूजा की मूर्ति में <strong>सिर्फ दो हाथ</strong> होते हैं और <strong>जीभ अंदर रहती है।</strong></p>
<p>उत्तम दत्त के अनुसार,</p>
<p>“चिताओं के बीच मां काली की यह पूजा सबसे पवित्र और रहस्यमयी मानी जाती है।”</p>
<h3><strong>टेंगरा का चीनी काली मंदिर </strong><strong>– Faith Beyond Borders</strong></h3>
<p>कोलकाता का <strong>टेंगरा इलाका</strong>, जो “<strong>चाइनाटाउन</strong>” के नाम से भी जाना जाता है, वहां एक बहुत ही अनोखा मंदिर है — <strong>चीनी काली मंदिर</strong>।<br />
यहां हिंदू और चीनी संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।</p>
<p>मंदिर के पुजारी <strong>अर्णब मुखर्जी</strong> बताते हैं कि करीब <strong>60 </strong><strong>साल पहले</strong> एक <strong>चीनी परिवार</strong> का बच्चा बहुत बीमार पड़ गया था।<br />
जब सारे इलाज नाकाम रहे, तो उसके परिवार ने एक <strong>पेड़ के नीचे रखी नारायण शिला (पवित्र पत्थर)</strong> की पूजा की।<br />
कहते हैं, कुछ ही दिनों में वह बच्चा <strong>चमत्कारिक रूप से ठीक हो गया।</strong></p>
<p>उसके बाद से चीनी समुदाय के लोगों में <strong>काली माता के प्रति गहरी श्रद्धा</strong> जागी। उन्होंने मिलकर <strong>मंदिर का निर्माण</strong> कराया।<br />
आज भी यहां चीन और भारत दोनों देशों के भक्त पूजा करने आते हैं — <strong>बीजिंग से भी लोग यहां पहुंचते हैं।</strong></p>
<p>मंदिर की एक खास बात यह है कि यहां <strong>मांस का भोग नहीं चढ़ाया जाता</strong>,<br />
क्योंकि यहां <strong>नारायण शिला</strong> है, इसलिए केवल <strong>शाकाहारी भोग</strong> ही चढ़ता है।</p>
<h3><strong>7 </strong><strong>अनोखी दिवाली सीरीज़ की बाकी कहानियां भी दिलचस्प हैं</strong></h3>
<p>यह रिपोर्ट “<strong>7 </strong><strong>अनोखी दिवाली</strong>” सीरीज़ का हिस्सा है, जिसमें देशभर की अलग-अलग परंपराएं बताई जा रही हैं —</p>
<h4><strong>अरुणाचल प्रदेश </strong><strong>– </strong><strong>मक्खन के दीयों से दिवाली</strong></h4>
<p>अरुणाचल के <strong>तवांग</strong> इलाके में दिवाली का मतलब होता है <strong>शांति और प्रार्थना</strong>।<br />
यहां <strong>पटाखों का शोर नहीं</strong>, बल्कि <strong>बटर लैंप्स (मक्खन के दीये)</strong> से रोशनी होती है।<br />
<strong>मोनपा जनजाति</strong> और बौद्ध अनुयायी अपने घरों और मठों में मक्खन के दीये जलाते हैं — ये पूरी तरह <strong>इको-फ्रेंडली दिवाली</strong> होती है।</p>
<h4><strong>केरल </strong><strong>– ‘</strong><strong>पोलियंथ्रा</strong><strong>’ </strong><strong>उत्सव</strong></h4>
<p>केरल के <strong>कासरगोड जिले</strong> में तूलूभाषी समुदाय दिवाली के दिन <strong>‘</strong><strong>पोलियंथ्रा</strong><strong>’</strong> मनाता है।<br />
वे <strong>एझिलम पाला पेड़ की </strong><strong>7 </strong><strong>शाखाओं</strong> से लकड़ी का <strong>दीपस्तंभ (</strong><strong>Poliyanthram Pala)</strong> बनाते हैं और उसे <strong>आंगन</strong><strong>, </strong><strong>कुएं या अस्तबल के पास</strong> सजाते हैं।<br />
यह त्योहार <strong>बालि पूजा</strong> और <strong>दीपोत्सव</strong> दोनों का प्रतीक है।</p>
<h4><strong>सिक्किम </strong><strong>– </strong><strong>तिहार उत्सव</strong></h4>
<p>सिक्किम में दिवाली को <strong>“</strong><strong>तिहार</strong><strong>”</strong> कहा जाता है। यह <strong>5 </strong><strong>दिन</strong> तक चलता है और इसे <strong>गोरखा समुदाय</strong> मनाता है।<br />
इस त्योहार में <strong>कौवों</strong><strong>, </strong><strong>कुत्तों</strong><strong>, </strong><strong>गायों और बैलों</strong> की पूजा होती है।<br />
मान्यता है कि <strong>यमुना ने यमराज को बुलाने के लिए इन्हीं को दूत के रूप में भेजा था।</strong><br />
यह त्योहार <strong>पशु-पक्षियों</strong><strong>, </strong><strong>प्रकृति और इंसानों के रिश्ते</strong> का उत्सव है।</p>
<p>दिवाली जहां एक ओर रोशनी, खुशी और उल्लास का प्रतीक है,<br />
वहीं देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे <strong>अलग अर्थों और आस्थाओं</strong> के साथ मनाया जाता है।<br />
<strong>बंगाल का श्मशान में जलता दीपक</strong>, <strong>अरुणाचल का मक्खन का दीया</strong>, <strong>केरल का लकड़ी का दीपस्तंभ</strong>,<br />
या <strong>सिक्किम की पशु पूजा</strong> — सब एक ही बात सिखाते हैं:</p>
<p>“अंधकार पर प्रकाश और भय पर विश्वास की जीत।”</p>
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		<title>Kedarnath Dham के कपाट खुले: 108 क्विंटल फूलों से सजा मंदिर, पहले ही दिन 10 हजार श्रद्धालु पहुंचे।</title>
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		<dc:creator><![CDATA[indlives]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 02 May 2025 00:34:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Dharam]]></category>
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					<description><![CDATA[Kedarnath Dham के कपाट शुक्रवार को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलते ही भक्तों ने मंदिर में जल रही अखंड ज्योति के दर्शन किए। इसके बाद रुद्राभिषेक, शिवाष्टक, शिव तांडव स्तोत्र और केदाराष्टक का पाठ किया गया। मंदिर में सबसे पहले कर्नाटक के वीरशैव लिंगायत समुदाय के मुख्य पुजारी (रावल) भीमशंकर पहुंचे। इसके [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">Kedarnath Dham के कपाट शुक्रवार को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलते ही भक्तों ने मंदिर में जल रही अखंड ज्योति के दर्शन किए। इसके बाद रुद्राभिषेक, शिवाष्टक, शिव तांडव स्तोत्र और केदाराष्टक का पाठ किया गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मंदिर में सबसे पहले कर्नाटक के वीरशैव लिंगायत समुदाय के मुख्य पुजारी (रावल) भीमशंकर पहुंचे। इसके बाद बाबा केदार पर छह महीने पहले चढ़ाया गया भीष्म शृंगार हटाया गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मंदिर को 54 किस्म के 108 क्विंटल फूलों से सजाया गया है। इसमें नेपाल, थाईलैंड और श्रीलंका जैसे विभिन्न देशों से लाए गए गुलाब और गेंदा के फूल शामिल हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पहले दिन करीब 10 हजार लोग दर्शन के लिए पहुंचे। भीड़ मैनेज करने के लिए टोकन सिस्टम से दर्शन करवाए जा रहे हैं। भक्त अब अगले 6 महीने तक दर्शन कर सकेंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जून से अगस्त के बीच मौसम ठीक रहा तो इस बार 25 लाख से ज्यादा लोगों के केदारनाथ धाम पहुंचने का अनुमान है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">30 अप्रैल (अक्षय तृतीया) से चारधाम यात्रा शुरू हो चुकी है। गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुल गए हैं। बद्रीनाथ धाम के कपाट 4 मई को खोले जाएंगे।</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img decoding="async" src="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2025/05/153d4b73-6c58-4872-b13c-99d5b65157b2-1024x576.webp" alt="" class="wp-image-22102" style="width:720px;height:auto" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>क्या है बाबा का भीष्म शृंगार, जिसे करने में 5 घंटे लगते हैं</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">पट खुलने के बाद भीष्म शृंगार हटाया जाएगा। यह प्रक्रिया भी दिलचस्प है। सबसे पहले शिवलिंग के पास रखे गए मौसमी फल और ड्राई फ्रूट्स का ढेर हटाते हैं। इसे आर्घा कहते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">फिर बाबा पर चढ़ी एक से लेकर 12 मुखी रुद्राक्ष की मालाएं निकालते हैं। इसके बाद शिवलिंग पर चारों ओर लपेटा गया सफेद कॉटन का कपड़ा हटाया जाता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पट बंद करते समय शिवलिंग पर 6 लीटर पिघले हुए शुद्ध घी का लेपन करते हैं, जो इस वक्त जमा होता है, इसे धीरे-धीरे शिवलिंग से निकालते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसके बाद होता है शिवलिंग का गंगा स्नान। गोमूत्र, दूध, शहद और पंचामृत स्नान के बाद बाबा केदार को नए फूलों, भस्म लेप और चंदन का तिलक लगाकर तैयार किया जाएगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कपाट बंद करते समय भीष्म शृंगार में करीब 5 घंटे लग जाते हैं, लेकिन कपाट खोलने के बाद इसे आधे घंटे में हटा दिया जाता है।</p>
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		<title>Vastu Tips: घर में गलती से भी न लगाएं ये पौधे, नहीं तो बनेगी नकारात्मक ऊर्जा</title>
		<link>https://indlives.com/do-not-plant-these-plants-in-the-house-even-by-mistake-otherwise-negative-energy-will-be-created/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ind Lives]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 10 Dec 2022 08:10:10 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Vastu Tips For Home]]></category>
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					<description><![CDATA[Vastu Tips: पेड़-पौधे सिर्फ विज्ञान की दृष्टि से ही नहीं बल्कि वास्तु शास्त्र की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। पेड़ सिर्फ ऑक्सीजन ही नहीं देते बल्कि एक तरह की ऊर्जा भी देते हैं। घर के आंगन में या गमले में कुछ पौधे लगाना घर को सकारात्मकता से भर देता है, लेकिन कुछ पौधे ऐसे भी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>Vastu Tips:</strong> पेड़-पौधे सिर्फ विज्ञान की दृष्टि से ही नहीं बल्कि वास्तु शास्त्र की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। पेड़ सिर्फ ऑक्सीजन ही नहीं देते बल्कि एक तरह की ऊर्जा भी देते हैं। घर के आंगन में या गमले में कुछ पौधे लगाना घर को सकारात्मकता से भर देता है, लेकिन कुछ पौधे ऐसे भी होते हैं जो घर में नकारात्मकता लाते हैं। साथ ही घर में कलह, स्वास्थ्य संबंधी परेशानी, दरिद्रता जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। हमारा आज का लेख इसी विषय पर है। इस लेख में हम आपको कुछ ऐसे पेड़ बताने जा रहे हैं जो घर में नकारात्मकता पैदा करते हैं।</p>
<p>बबूल का पेड़<br />
घर में बबूल का पेड़ लगाना अशुभ माना जाता है। इस पेड़ को घर में लगाने से घर में स्थायी रूप से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। यदि आपके घर के पास बबूल का पेड़ है तो यह मुख्य द्वार के सामने नहीं होना चाहिए। Vastu Tips</p>
<p>फुंसी<br />
पीपल के पेड़ का आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक है। पिंपल को बहुत पवित्र माना जाता है और इसकी पूजा की जाती है। कई लोग पूजा के उद्देश्य से घर में पीपल का पेड़ लगाते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार इस पेड़ को घर में लगाना अशुभ माना जाता है। यदि पिंपल के युवा पौधे अपने आप दिखाई देने लगें तो उन्हें हटा देना चाहिए।</p>
<p>इमली<br />
इमली का पेड़ नकारात्मक ऊर्जा पैदा करता है और फैलाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में इमली का पेड़ लगाना अशुभ माना जाता है। यह पेड़ कांटों वाले पेड़ों की श्रेणी में आता है। इमली का पेड़ लगाने से घर में कलह शुरू हो जाती है। साथ ही घर में दरिद्रता आती है।</p>
<p>कैक्टस<br />
वास्तु शास्त्र के अनुसार कैक्टस का पौधा घर में लगाना अशुभ होता है। यह पौधा असहमति और झगड़े का कारण बनता है। कैक्टस एक कांटेदार पौधा है, यह कुल की मिठास को नष्ट कर देता है। कैक्टस का पौधा लगाने से घर में दरिद्रता आती है। यह कांटेदार पौधा रिश्तों में खटास पैदा करता है।</p>
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		<title>श्री गणेश के खास उपाय, जिससे धन-धान्य से भर जाएगी झोली Dharam karam</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Naresh Arora]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 10 Oct 2020 02:45:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री गणेश के खास उपाय, जिससे धन-धान्य से भर जाएगी झोली  Dharam karam shree ganesh ke khaas upaay, jisase dhan-dhaany se bhar jaegee jholee Dharam karam बुद्धि के कारक देव श्री गणेश को सनातन धर्म में प्रथम पूज्य देव माना जाता है। वहीं सप्ताह के दिनों में श्री गणेश बुधवार के कारक देव माने जाते हैं। अत: [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div class="tlid-source-transliteration-container source-transliteration-container transliteration-container">
<h2>श्री गणेश के खास उपाय, जिससे धन-धान्य से भर जाएगी झोली  Dharam karam</h2>
<h2 class="tlid-transliteration-content transliteration-content full">shree ganesh ke khaas upaay, jisase dhan-dhaany se bhar jaegee jholee Dharam karam</h2>
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<p>बुद्धि के कारक देव श्री गणेश को सनातन धर्म में प्रथम पूज्य देव माना जाता है। वहीं सप्ताह के दिनों में श्री गणेश बुधवार के कारक देव माने जाते हैं। अत: शास्त्रों में भी बुधवार का दिन गणपति की पूजा के लिए विशेष माना जाता है।</p>
<p>पंडित सुनील शर्मा के अनुसार मान्यता के मुताबिक इस दिन गणेश भगवान की विशेष पूजा करने से आपको सभी कार्यों में सफलता मिलेगी और भाग्य भी आपका साथ देगा। माना जाता है कि बुधवार के दिन भगवान श्री गणेश की विशेष पूजा की जाए, तो व्यक्ति की सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। इसके साथ ही इससे नए ही नहीं पुराने से पुराने रुके हुए काम भी पूरे हो जाते हैं।</p>
<p>वहीं ये भी माना जाता है कि भगवान श्री गणेश की विशेष पूजा से पूजा-अर्चना करने से घर में सुख शांति और समृद्ध‍ि आती है। बुधवार के दिन भगवान गणेश से जुड़े ये उपाय करने से जीवन से जुड़ी सभी परेशानियां दूर हो सकती हैं। श्री गणेश की कृपा से, नए ही नहीं पुराने से पुराने रुके हुए काम भी पूरे हो जाते हैं।</p>
<p>गणेश चतुर्थी 2020 &#8211; ऐसे करें विघ्नहर्ता श्रीगणेश को प्रसन्न, जीवन के सारे तनाव कर देंगे दूर</p>
<p>पंडित शर्मा के अनुसार, बुधवार के दिन कुछ उपाय किए जाए तो बुध ग्रह का अच्छा प्रभाव पड़ता है। अगर आप पर बुध दोष है और आप इस दोष से जल्दी बाहर निकलना चाहते हैं, तो बुधवार के दिन किए गए ये छोटे-छोटे उपाय आपका दोष खत्म कर सकते हैं।</p>
<p>हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार, भगवान गणपति की पूजा करने का एक विशेष तरीका होता है। यदि विधिवत उनकी पूजा की जाए तो गणपति प्रसन्न होकर तमाम बाधाओं परेशानियों और तनाव से मुक्ति दे देते हैं। इसलिए माना जाता है कि बुधवार के दिन यदि आप अपने घर में गणपति की स्थापना करें और सफेद गणपति ही लाएं तो आपके घर-परिवार पर आई विपत्ति, शत्रु बाधा या तंत्र शक्तियों का प्रभाव खत्म हो जाएगा।</p>
<p>ऐसे करें पूजा&#8230;<br />
इसके अलावा कार्य सफलता के लिए- रुके हुए कार्यों को पूरा करना चाहते हैं, तो बुधवार के दिन घर में ही मिट्टी की गणेश प्रतिमा बनाएं। इस प्रतिमा का ताजे गन्ने के रस और 108 सफेद दुर्वा से अभिषेक करें। ऐसा करने से पुराने से पुराने रुके हुआ कार्य भी पूरे हो जाएंगे। इतना ही नहीं भगवान गणेश आपकी हर मनोकामना पूरी करेंगे। बुधवार के दिन सुबह गणेश जी को दुर्वा की 11 या 21 गांठ चढ़ाएं। ऐसा करने से आपको जल्द ही शुभ फल मिलेगा और आपकी मनोकामना पूर्ण होगी।</p>
<p>धन वैभव के लिए-<br />
बुधवार के दिन सुबह कांसे की थाली में चंदन से ‘ऊं गं गणपतयै नमः’ लिखें। उसके बाद थाली में पांच बूंदी के लड्डू रखकर नजदीक के गणेश मंदिर में दान करें। इस उपाय को करने से धन प्राप्ति में आ रही सभी बाधाएं खत्म हो जाएगी। हर बुधवार जरूरतमंदों को हरी मूंग का दान जरूर करें। ऐसा करके आप अपने संबंधों में आई खटास को दूसर कर सकते हैं।</p>
<p>परेशानियों से निजात के लिए-<br />
अगर आपकी कोई विशेष मनोकामना है या जीवन में कुछ परेशानियां है तो किसी पुराने गणेश मंदिर में जाएं। पुराने गणेश मंदिर में जाकर पूजा सुपारी में कलावा बांधकर 11 दुर्वा के साथ गणेश जी के सीधे हाथ में रख दें। ऐसा करने के बाद हाथ जोड़कर अपनी मनोकामना पूर्ति और परेशानियों को दूर करने के लिए प्रार्थना करें। कहते हैं ऐसा करने से इंसान जल्द ही लाभ मिलेगा।</p>
<p>मनचाही मुराद के लिए- हर बुधवार को गणेश मंदिर जाएं और 21 गुड़ की ढेली और 21 दुर्वा श्री गणेश मंदिर में जाकर भगवान को अर्पित कर दें। इससे आपकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होगी। मनोकामना पूर्ति के अलावा यदि आप चाहते हैं कि आपको अधिक धन की प्राप्ति हो तो बुधवार के दिन गणेश जी को शुद्ध घी और गुड़ का भोग लगाएं।</p>
<p>बुध दोष से निजात के लिए-<br />
अगर आप पर बुध दोष का प्रभाव है तो आपको सबसे छोटी उंगली में पन्न रत्न धारण करना चाहिए। पर इससे पहले ज्योतिषी से सलाह जरूर ले लें। बुधवार के दिन गाय को हरी घास खि‍लाने से भी गणपति की कृपा होती है और बुध दोष का प्रभाव कम होता है। बुधवार के दिन गणपति को सिंदुर चढ़ाएं। इससे सभी परेशानियां दूर हो जाएंगी।</p>
<p>अन्य उपाय&#8230;<br />
मोदक<br />
गणेश जी को प्रसन्न करने का दूसरा सरल तरीका है मोदक का भोग। गणपति अथर्वशीर्ष में लिखा है कि जो व्यक्ति गणेश जी को मोदक का भोग लगाता है गणपति उनका मंगल करते हैं। मोदक का भोग लगाने वाले की मनोकामना पूरी होती है। शास्त्रों में मोदक की तुलना ब्रह्म से की गयी है। मोदक भी अमृत मिश्रित माना गया है।</p>
<p>सुख समृद्धि के लिए-<br />
बुधवार के दिन गाय को हरा चारा खिलाएं। ऐसा करने से आपके घर के सारे क्लेश और मन मुटाव दूर हो जाएंगे। घर में सुख शांति और समृद्धि आएगी।</p>
<p>गाय को हरी घास खि‍लाने से भी गणपति की कृपा होती है और बुध दोष का प्रभाव कम होता है। बुधवार के दिन सात साबुत कौडियां लें और एक मुट्ठी हरा खड़ा मूंग लें। इन दोनों को हरे कपड़े में बांध लें। और भोर में किसी मंदिर की सीढ़ी पर चुपचाप रख आएं।</p>
<p>नकारत्मक ऊर्जा और कन्या का शीघ्र विवाह-<br />
बुधवार के दिन घर में श्वेतार्क गणपति (सफेद आंकडे की जड़ से बनी गणपति) की स्थापना करने से सभी प्रकार की तंत्र शक्ति का नाश हो जाता है व ऊपरी हवा का असर भी नहीं होता।</p>
<p>मान्यता के अनुसार यदि किसी कन्या का विवाह नहीं हो पा रहा है तो वह कन्या बुधवार को विवाह की कामना से भगवान श्रीगणेश को मालपुए का भोग लगाए तो शीघ्र ही उसका विवाह हो जाता है।</p>
<p>गृह दोष-<br />
अगर आपको राहु की समस्या है तो बुधवार की रात को एक नारियल सिर के पास रखकर सो जाएं। और अगले दिन वह नारियल गणेश जी के मंदिर में कुछ दक्षिणा के साथ चढ़ा दें। साथ ही विघ्नहर्ता गणेश स्रोत का पाठ भी करें।</p>
<p>एक हांडी में सवा किलो साबुत हरी मूंग दाल और दूसरी हांडी में सवा किलो नमक भरकर रखें। इन दोनों हांडियों को घर के किचन में कहीं पर भी रख दें। माना जाता है कि ऐसा करने से घर में आकस्मिक संकट नहीं आएगा।</p>
<p>Wednesday, God Worship, Hindu God Puja Vidhi, Hindu God Worship, Lord Ganesha, , lord ganesha worship on wednesday can make you rich, lord ganesha worship on wednesday, can make you rich, lord ganesha, worship on wednesday, can make you rich, lord ganesh, lord ganesha idol immersions, Praise to Lord Ganesha, Lord ganesha worshiped, worship lord ganesha at home, facts about Lord Ganesha, how to worship Lord Ganesh, mantras of lord ganesha, lord ganesh puja vidhi, blessings of lord ganesh puja vidhi, how to get blessings of lord ganesh, rich, rich, Lord Ganesh special puja vidhi, Lord Ganesha special puja vidhi, Lord Ganesh ji special puja vidhi, Lord Ganesh ji puja vidhi, Lord Ganesh ji, lord ganesh ji</p>
<p>&nbsp;</p>
<h2><span style="color: #ff0000;"><a style="color: #ff0000;" title="" href="http://indlives.com/if-you-want-to-get-your-love-then-you-should-do-this-remedy-in-love-marriage-upay/" target="_blank" rel="noopener">आप चाहते है की आप का प्यार आप को मिले तो करें ये उपाय Love Marriage Upay</a></span></h2>
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<span style="color: #ff0000;"><strong>अभी कॉल करे |</strong></span><br />
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<span style="color: #ff0000;"><strong>मोबाइल नंबर:</strong></span><br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>+91-7526904438,</strong></span><br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>+91 98417 18786,</strong></span></h2>
<p><strong><span style="color: #000000;">गणेश जी के टोटके,गणेश जी को दूर्वा चढ़ाने के फायदे,गणेश जी को खुश करने के उपाय,गणेश जी को दूर्वा कैसे चढ़ाएं,गणेश जी के चमत्कार,गणेश जी के शक्तिशाली मंत्र,बाधाओं को दूर करने के लिए गणेश मंत्र,श्री गणेश की खबर आज की,</span></strong></p>
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			</item>
		<item>
		<title>नींबू-लौंग के ये टोटके एक रात में दूर कर देंगे आपकी बड़ी से बड़ी समस्या Dharm Tips</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Naresh Arora]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 10 Oct 2020 02:42:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नींबू-लौंग के ये टोटके एक रात में दूर कर देंगे आपकी बड़ी से बड़ी समस्या Dharm Tips neemboo-laung ke ye totake ek raat mein door kar denge aapakee badee se badee samasya dharm tips तांत्रिक ग्रंथों में कई ऐसे प्रयोगों के बारे में बताया गया है। जिनकी मदद से असंभव कार्य को भी संभव बनाया [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h3>नींबू-लौंग के ये टोटके एक रात में दूर कर देंगे आपकी बड़ी से बड़ी समस्या Dharm Tips</h3>
<h3>neemboo-laung ke ye totake ek raat mein door kar denge aapakee badee se badee samasya dharm tips</h3>
<p>तांत्रिक ग्रंथों में कई ऐसे प्रयोगों के बारे में बताया गया है। जिनकी मदद से असंभव कार्य को भी संभव बनाया जा सकता है। इन प्रयोगों में विशेष पौधे, पूजा सामग्री, फल तथा अन्य चीजों का उपयोग होता है। तंत्र के अनुसार नींबू तथा लौंग के टोने-टोटके द्वारा जीवन की कई समस्याओं को एक झटके में खत्म किया जा सकता है।</p>
<p>यदि घर में किसी बच्चे या बड़े व्यक्ति को बुरी नजर लग जाए तो उसके सिर से पैर तक सात बार नींबू वार लें। इसके बाद इस नींबू के चार टुकड़े करके किसी सुनसान स्थान या किसी तिराहे पर फेंक दें। ध्यान रखें नींबू के टुकड़े फेंकने के बाद पीछे न देखें और सीधे घर आ जाएं। नजर तुरंत दूर हो जाएगी। यदि किसी व्यक्ति का व्यापार ठीक से नहीं चल रहा है तो उसे शनिवार के दिन नींबू का तांत्रिक उपाय करना चाहिए।</p>
<p>इस उपाय के अनुसार एक नींबू को दुकान की चारों दीवारों से स्पर्श कराएं। इसके बाद नींबू को चार टुकड़ों में अच्छे से काट लें और चौराहे पर जाकर चारों दिशाओं में नींबू का एक-एक टुकड़ा फेंक दें। इससे दुकान, व्यापार स्थल की नेगेटिव एनर्जी नष्ट हो जाएगी। घर की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए घर में नींबू का पेड़ लगाए।</p>
<p>नींबू के पेड़ से आसपास का वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रहता है। इसके साथ ही नींबू का पेड़ घर में लगाने से घर का वास्तु दोष भी दूर होता है। प्रचलित मान्यता के अनुसार अगर सुई लगा नींबू किसी बीमार के सिर पर से 7 बार वार (उसार) कर चौराहे पर रख देना चाहिए। चौराहे से जाते हुए जो भी व्यक्ति उस नींबू को पार कर चला जाएगा या उसे स्पर्श करेगा तो बीमार व्यक्ति की सारी बीमारी उसको को लग जाती है।</p>
<p>यदि कोई व्यक्ति अचानक ही बीमार हो जाए तथा उस पर दवाओं का कोई असर न हों तो इसके लिए भी नींबू का उपाय किया जाता है। ऐसी स्थिति में एक साबूत नींबू के उपर काली स्याही से 307 लिख दें और उस व्यक्ति के उपर उल्टी तरफ से 7 बार उतारें। इसके पश्चात उसी नींबू को चार भागों में इस प्रकार से काटें कि वह नीचें से जुड़े रहें। और फिर उसी नींबू को घर से बाहर किसी निर्जन स्थान पा फेंक दें। इस उपाय को करने से पीडि़त व्यक्ति 24 घंटों के अंदर ही स्वस्थ हो जायेगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>अगर आपको कड़ी मेहनत के बाद भी बार-बार असफलता मिल रही है तो नींबू का एक छोटा सा उपाय आपके सारे काम बना देगा। इसके लिए आप एक नींबू और 4 लौंग लेकर किसी निकट के हनुमान मंदिर में जाएं। वहां हनुमानजी की प्रतिमा के सामने बैठकर नींबू के ऊपर चारों लौंग लगा दें, इसके बाद हनुमानचालिसा का पाठ करें। पाठ करने के बाद हनुमानजी से सफलता दिलवाने की प्रार्थना करें और इस नींबू को जेबा में लेकर जाएं। आपको निश्चित ही सफलता मिलेगी।</p>
<p>ध्यान रखें</p>
<p>(1) जब भी टोटका करने के बाद नींबू फेंके तो पीछे मुड़कर कभी न देखें। सीधे अपने घर की तरफ आ जाएं।<br />
(2) कभी-कभी रोड पर नींबू-मिर्च पड़ी हुई दिख जाती है, किसी चौराहे या तिराहे पर कोई नींबू या नींबू के टुकड़े पड़े रहते हैं तो ध्यान रखें उन हमारा पैर नहीं लगाना चाहिए।</p>
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		<title>अगर किसी भी काम में भाग्य आपका साथ नहीं दे रहा है। अपनाएं ये चमत्कारी टोटका</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Naresh Arora]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 Sep 2020 17:25:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अगर किसी भी काम में भाग्य आपका साथ नहीं दे रहा है। अपनाएं ये चमत्कारी टोटका Dhram totke अगर किसी भी काम में आपका भाग्य आपका साथ नहीं दे रहा है। अगर आप सारे जतन कर के हार गए हैं तो एक बार इस उपाय को अवश्य आजमाएं। सरसों के तेल में सिके गेहूं के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h3>अगर किसी भी काम में भाग्य आपका साथ नहीं दे रहा है। अपनाएं ये चमत्कारी टोटका Dhram totke</h3>
<p>अगर किसी भी काम में आपका भाग्य आपका साथ नहीं दे रहा है। अगर आप सारे जतन कर के हार गए हैं तो एक बार इस उपाय को अवश्य आजमाएं।</p>
<p>सरसों के तेल में सिके गेहूं के आटे व पुराने गुड़ से तैयार सात पूए, सात मदार (आक) के पुष्प, सिंदूर, आटे से तैयार सरसों के तेल का रूई की बत्ती से जलता दीपक, पत्तल या अरंडी के पत्ते पर रखकर शनिवार की रात को किसी चौराहे पर रखें और कहें &#8211; &#8216;हे मेरे दुर्भाग्य तुझे यहीं छोड़े जा रहा हूं कृपा करके मेरा पीछा ना करना।&#8217; सामान रखकर पीछे मुड़कर न देखें।</p>
<p>विवाह हो या व्यापार, परीक्षा हो या प्यार हर काम में आपका भाग्य तेजी से आपका साथ देने लगेगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<h2><span style="color: #ff0000;"><a style="color: #ff0000;" title="" href="http://indlives.com/if-you-want-to-get-your-love-then-you-should-do-this-remedy-in-love-marriage-upay/" target="_blank" rel="noopener">आप चाहते है की आप का प्यार आप को मिले तो करें ये उपाय Love Marriage Upay</a></span></h2>
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		<title>पति पत्नी में अनबन दूर करने के शक्तिशाली  उपाय Dharm Tips</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Naresh Arora]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Sep 2020 07:56:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पति पत्नी में अनबन दूर करने के शक्तिशाली उपाय Dharm Tips,  Pati Patni me Anban Ladai Takrar Kalesh Dur Karne ke Tantrik Upay Pati Patni me Anban Ladai Takrar Kalesh Dur Karne ke Tantrik Upay- पति-पत्नी के बीच झगड़े होना आम बात है। लेकिन कहीं ऐसा न हो कि पति-पत्नी के बीच झगड़े अलग होने [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1>पति पत्नी में अनबन दूर करने के शक्तिशाली उपाय Dharm Tips,</h1>
<h1> Pati Patni me Anban Ladai Takrar Kalesh Dur Karne ke Tantrik Upay</h1>
<p>Pati Patni me Anban Ladai Takrar Kalesh Dur Karne ke Tantrik Upay- पति-पत्नी के बीच झगड़े होना आम बात है। लेकिन कहीं ऐसा न हो कि पति-पत्नी के बीच झगड़े अलग होने का कारण न बन जाए, इसके लिए जरूरी है कि पहले ही उसके उपाय के बारे में जान लिया जाए।</p>
<h3>Pati Patni me Anban Ladai Takrar Kalesh Dur Karne ke Tantrik Upay-</h3>
<p>पति-पत्नी का रिश्ता रूठने और मनाने का होता हैं। एक रूठता है तो दूसरा उसको मनाने में लग जाता हैं। लेकिन कभी-कभी हालात कुछ ऐसे हो जाते हैं और बात इतनी बढ़ जाती है कि हर समय यह झगडा चलता रहता है और बात तलाक तक भी पहुँच जाती हैं। वैसे तो ये आपसी समझाइश से हल होने वाला मुद्दा हैं, लेकिन ज्योतिषीय उपाय से भी इसका हल निकला जा सकता हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे ज्योतिषीय उपाय जो पति-पत्नी के बीच अनबन को दूर करने में उपयोगी हैं।</p>
<p>* अगर आप दोनों ही अपने बिगड़ते रिश्ते को ठीक करना चाहते हैं तो पति अपनी पत्नी के तकिए के नीचे कपूर और पत्नी अपने पति के तकिए के नीचे सिंदूर की एक पुडिया रख दे। अगले दिन सुबह उठकर उस कपूर को जला दें और सिंदूर की पुडिया को बाहर फेंक दें। इस उपाय के बाद निश्चित ही आप दोनों के रिश्ते की कड़वाहट में कमी आएगी। पति-पत्नी के बीच रोज़ झगड़ा होता है तो अपने वैवाहिक जीवन के सुख को वापिस पाने के लिए पति-पत्नी दोनों भगवान गणेश को समर्पित बुधवार के दिन मौन व्रत रखें।</p>
<p>* गेंहू पिसवाने के पहले उसमें सौ ग्राम काले चना मिलाकर पिसवाए। हाँ ध्यान रहे गेंहूं केवल शनिवार या सोमवार को ही पिसवाए। इस प्रकार का आटा खाने से पति पत्नी के बीच प्यार बढ़ता है।</p>
<p>* लाल स्याही से पति का नाम लिखें और &#8216;हं हनुमंते नम:&#8217; का 21 बार जाप करते हुए उस पत्र को घर के किसी कोने में रखें। कहते हैं, ऐसा करने से आपसी कलह का निवारण होता है।</p>
<h2>Pati Patni me Anban Ladai Takrar Kalesh Dur Karne ke Tantrik Upay</h2>
<p>* दुर्गा माँ का पूजन हर परेशानी को दूर करने में सहायक होता है। पति-पत्नी के बीच झगड़े से मुक्ति पानी हो तो निम्न मंत्र का जाप दुर्गा जी की तस्वीर के सामने करें। रोज एक माला करने से निश्चय ही पति पत्नी के बीच प्यार बढ्ने के उपाय करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।</p>
<p>* शुक्रवार के दिन भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी को रस वाली मिठाई का भोग लगाएं और प्रसाद के तौर पर पति-पत्नी दोनों इसे ग्रहण करें।</p>
<p>* गुरुवार के दिन पीपल के पेड़ के पास घी का दीपक जलाएं और एक दीपक चौराहे पर रख आएं। साथ ही एक दोने में मिठाई रखकर भी रख दें।</p>
<p>* रंग-बिरंगे फूलों से घर ही नहीं रिश्ते भी सजाये जा सकते हैं। पति पत्नी के बीच प्यार बढ़ाने के उपाय के लिए गेंदे के फूलों का सहारा लिया जा सकता है। कुछ गेंदे के फूल लेकर उनपर कुमकुम का निशान लगा लें। अब इन फूलों को भगवान के सामने चड़ा दें।</p>
<p>* अगर पति-पत्नी के बीच वैचारिक मतभेदों के कारण झगड़ा होता है तो आप शुक्रवार के दिन ये उपाय करें। एक मिट्टी के बर्तन में सवा किलो मशरूम भरें और इसे अपने घर के पूजन स्थल में अपने सामने रखें। अब पति-पत्नी दोनों तीन-तीन माला महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। इसके पश्चात् मशरूम के पात्र को मां भगवती के चरणों में रखा रहने दें। इस उपाय से आपके दांपत्य सुख में वृद्धि होगी।</p>
<p>* दांपत्य सुख को बढ़ाने के लिए शिव-पार्वती की आराधना करें। भगवान शिव और माता पार्वती एक सुखी दांपत्य का प्रतीक हैं। उनके आशीर्वाद से आपका वैवाहिक जीवन भी खुशियों से महकने लगेगा और आप दोनों के बीच आपसी प्रेम में भी वृद्धि होगी।</p>
<h2> <span style="color: #ff0000;">Pati Patni me Anban Ladai Takrar Kalesh Dur Karne ke Tantrik Upay</span></h2>
<h1><a title="" href="http://indlives.com/if-you-want-to-get-your-love-then-you-should-do-this-remedy-in-love-marriage-upay/" target="_blank" rel="noopener">आप चाहते है की आप का प्यार आप को मिले तो करें ये उपाय Love Marriage Upay</a></h1>
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<p><strong>लव मैरिज, फॅमिली, करियर, बिज़नेस, लव बैक, दुश्मन और जादू टोने का वशीकरण</strong></p>
<p><strong>घर क्लेश होना,पति पत्नी में अनबन सौतन व दुश्मन से छुटकारा।</strong><br />
<strong>वशीकरण करना या तोड़नाआपका खोया हुआ प्यार वापस पाएं आपकी शादी के लिए अपने या अपने प्रेमी-प्रेमिका के घर वालों को मनाना।व्यापारिक समस्या बीमारी में दवा नहीं लगना या ऊपरी बाधा का हो जाना। .विदेश यात्रा में रुकावट आना, शादी में रुकावट आना बना बनाया काम बिगड़ जाना, रूठे प्यार को मनाना नौकरी में तरक्की ना होना</strong></p>
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<h3></h3>
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		<title>Janamashtami 2020: जन्माष्टमी के दिन क्या करें और क्या न करें? जानें पूजा का शुभ मुहूर्त</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Naresh Arora]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 10 Aug 2020 18:09:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[Janamashtami 2020: जन्माष्टमी के दिन क्या करें और क्या न करें? जानें पूजा का शुभ मुहूर्त janmashtami 2020: janmashtami ke din kya karen aur kya na karen? jaanen pooja ka shubh muhoort Sri Krishna: हर साल भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कृष्ण जन्माष्टमी (Janamashtami 2020) का त्योहार मनाया जाता है। इस साल [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h3>Janamashtami 2020: जन्माष्टमी के दिन क्या करें और क्या न करें? जानें पूजा का शुभ मुहूर्त</h3>
<h3>janmashtami 2020: janmashtami ke din kya karen aur kya na karen? jaanen pooja ka shubh muhoort</h3>
<p>Sri Krishna: हर साल भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कृष्ण जन्माष्टमी (Janamashtami 2020) का त्योहार मनाया जाता है। इस साल यह त्योहार 11-12 अगस्त यानी दो दिन मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों की मानें तो 12 अगस्त को Janamashtami मनाना ज्यादा उत्तम है। Janamashtami के दिन Sri Krishna के बाल स्वरुप की उपासना की जाती है। हिंदू धर्म मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को ही Sri Krishna का जन्म हुआ था।</p>
<p>Janamashtami के दिन लोग भगवान Sri Krishna का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उपवास रखने के साथ ही भजन-कीर्तन और विधि-विधान से पूजा करते हैं। लेकिन कृष्ण पूजन में मनचाहा वरदान और आशीर्वाद प्राप्ति के लिए कुछ चीजों का ध्यान रखना जरुरी है।</p>
<p>पूजा का समय-</p>
<p>Janamashtami के दिन कई लोग सुबह या शाम के वक्त पूजा करते हैं। लेकिन ध्यान रहे कि भगवान Sri Krishna का जन्म आधी रात को हुआ था, ऐसे में उस वक्त ही पूजा करना लाभकारी माना जाता है।</p>
<p>साफ बर्तन-</p>
<p>भगवान Sri Krishna की पूजा में साफ बर्तनों का इस्तेमाल करना चाहिए। ध्यान रहे कि वह बर्तन किसी भी मांसाहारी भोजन के लिए न इस्तेमाल किये गए हो।</p>
<p>दिशा-</p>
<p>Janamashtami के दिन झांकी की दिशा का विशेष ध्यान रखें। दिशा की जानकारी के लिए आप विशेषज्ञ की सलाह ले सकते हैं।</p>
<p>भोग-</p>
<p>भगवान Sri Krishna को Janamashtami के दिन पंचामृत का भोग लगाना शुभ माना जाता है।</p>
<p>क्या न करें?</p>
<p>Janamashtami के दिन भगवान Sri Krishna को नई पोशाक जरुर पहनाएं। कई बार दुकानदार पुराने कपड़े नए के रुप में बेच देते हैं। ऐसे में खरीदारी के वक्त इसका ध्यान रखें।</p>
<p>शुभ मुहूर्त-</p>
<p>12 अगस्त को पूजा का शुभ समय रात 12 बजकर 5 मिनट से लेकर 12 बजकर 47 मिनट तक है। पूजा की अवधि 43 मिनट तक रहेगी।</p>
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