लेह में हिंसा की आग: जवानों पर पत्थर, गाड़ियां फूंकी, कौन भड़का रहा लद्दाख?

लद्दाख के लेह में बुधवार को हिंसा भड़क गई। सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी हुई, गाड़ियों में आगजनी हुई और कई इमारतों से धुआं उठता दिखा। सवाल यह है कि जिस लेह को शांति और पर्यटन के लिए जाना जाता है, वहां अचानक माहौल इतना तनावपूर्ण कैसे हो गया?

लेह की सड़कों पर क्यों भड़की आग?

सुबह तक लेह का माहौल सामान्य था, लेकिन दोपहर 12 बजे जैसे ही प्रदर्शनकारी मुख्य बाजार और हिल काउंसिल इलाके में जुटने लगे, स्थिति बिगड़ गई। भीड़ को रोकने के लिए सीआरपीएफ की तैनाती थी, लेकिन युवाओं ने अचानक सुरक्षाबलों पर पथराव शुरू कर दिया।
भीड़ ने एक CRPF वाहन पर पत्थरों की बौछार की और फिर उसे आग के हवाले कर दिया। इसके बाद आगजनी की घटनाएं तेज़ होती चली गईं। प्रदर्शनकारियों ने हिल काउंसिल भवन और बीजेपी कार्यालय पर हमला बोला। बीजेपी दफ्तर को पूरी तरह जला दिया गया, वहीं दर्जनभर गाड़ियों को भी आग के हवाले कर दिया गया।

अनशन से शुरू हुआ आंदोलन, कैसे हुआ हिंसक?

पिछले दो हफ्तों से लद्दाख में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के नेतृत्व में 15 लोग अनशन पर बैठे थे। उनकी मांग थी कि लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए। मंगलवार को अनशन पर बैठे दो लोगों की तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद ही लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कांग्ला रिगजोड (KDA) नामक संगठनों ने प्रदर्शन का आह्वान किया।
सैकड़ों की संख्या में युवा सड़कों पर उतरे। शुरुआत में यह आंदोलन शांतिपूर्ण था, लेकिन कुछ ही देर में यह हिंसक हो गया। हालांकि, हिंसा के बाद सोनम वांगचुक ने छात्रों से शांति बनाए रखने और हिंसा रोकने की अपील की है।

साजिश या स्वतः स्फूर्त? उठ रहे कई सवाल

हिंसा के बाद कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। दरअसल, केंद्र सरकार पहले ही 6 अक्टूबर को LAB और KDA के साथ वार्ता करने का ऐलान कर चुकी थी। जबकि संगठन 25-26 सितंबर को बातचीत चाहते थे। ऐसे में जब बातचीत की संभावना बनी हुई थी, तब हिंसा क्यों भड़की?

स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कुछ राजनीतिक भाषणों में पथराव और बंद जैसी बातें कही गई थीं, जिससे भीड़ को उकसाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। सवाल सोनम वांगचुक के रोल को लेकर भी उठ रहे हैं—क्या उन्होंने इस आंदोलन का इस्तेमाल अपने निजी एजेंडे के लिए किया? या फिर कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने युवाओं को भड़काया? जांच जारी है।

आखिर क्यों मांग रहा है लद्दाख राज्य का दर्जा?

लद्दाख फिलहाल केंद्र शासित प्रदेश (UT) है। लेकिन यहां के युवा चाहते हैं कि इसे पूर्ण राज्य का दर्जा मिले। उनकी मांग के पीछे चार प्रमुख कारण बताए जाते हैं-

1. सांस्कृतिक और जनजातीय पहचान की रक्षा
लद्दाख की 97% आबादी अनुसूचित जनजाति है। युवाओं का डर है कि बाहरी निवेश और जनसंख्या बदलाव से उनकी संस्कृति, भाषा और परंपराएं खतरे में हैं। राज्य का दर्जा मिलने पर स्थानीय कानून से इन्हें सुरक्षा मिलेगी।

2. भूमि और संसाधनों पर नियंत्रण
UT होने के कारण भूमि और संसाधनों पर केंद्र का नियंत्रण है। युवाओं का मानना है कि राज्य बनने से स्थानीय नियंत्रण बढ़ेगा और बाहरी दखल कम होगा।

3. रोजगार की गारंटी
आरोप है कि नौकरियां बाहरी लोगों को मिल रही हैं। राज्य का दर्जा मिलने के बाद स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता मिलेगी और बेरोजगारी कम होगी।

4. राजनीतिक प्रतिनिधित्व
धारा 370 हटने से पहले जम्मू-कश्मीर विधानसभा में लद्दाख के 4 विधायक होते थे। लेकिन अब यहां विधानसभा नहीं है, केवल नौकरशाही है। लद्दाख के युवा अपनी विधानसभा और स्थानीय नेतृत्व चाहते हैं।